1 मई 2025 को बेंगलुरु के ईस्ट पॉइंट कॉलेज में आयोजित एक कॉन्सर्ट के दौरान मशहूर गायक सोनू निगम एक विवाद के केंद्र में आ गए। यह घटना तब सामने आई जब एक प्रशंसक ने उनसे कन्नड़ भाषा में गीत गाने की मांग की। सोनू निगम ने इस मांग पर नाराजगी जताते हुए हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिससे दर्शकों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। इस घटना ने भारत में भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता के बीच तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया।
क्या हुआ बेंगलुरु कॉन्सर्ट में?
सोनू निगम, जो अपनी मधुर आवाज और विभिन्न भाषाओं में गायन के लिए जाने जाते हैं, बेंगलुरु में एक कॉन्सर्ट के दौरान प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान एक युवा प्रशंसक ने उनसे कन्नड़ में गीत गाने की मांग की। प्रशंसक ने बार-बार “कन्नड़, कन्नड़” चिल्लाकर अपनी मांग दोहराई। सोनू निगम ने इस मांग को असभ्य करार देते हुए जवाब दिया, “मैं उस लड़के को पसंद नहीं करता, जिसकी उम्र शायद उतनी भी नहीं होगी जितने समय से मैं कन्नड़ गाने गा रहा हूँ। उसने बहुत असभ्य तरीके से मुझसे ‘कन्नड़, कन्नड़’ कहकर धमकी दी।”
सोनू ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “मैंने अपने जीवन के सबसे बेहतरीन गाने कन्नड़ में गाए हैं। मैं कर्नाटक के लोगों और उनकी समृद्ध संगीतमय विरासत का हमेशा सम्मान करता हूँ।” लेकिन इसके बाद उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने विवाद को जन्म दे दिया। उन्होंने कहा, “यही वजह है कि पहलगाम में जो हुआ, वही वजह है जो आप अभी कर रहे हैं। देखें तो सामने कौन खड़ा है।”
पहलगाम हमला: क्या है पूरा मामला?
सोनू निगम ने जिस पहलगाम हमले का जिक्र किया, वह 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ एक आतंकी हमला था। इस हमले में पांच हथियारबंद आतंकवादियों ने बाइसारन घाटी में पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 28 नागरिकों की मौत हो गई। यह हमला 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में इस तरह का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक सहयोगी माना जाता है, ने शुरू में इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। टीआरएफ ने दावा किया कि यह हमला भारतीय सरकार की उस नीति के विरोध में था, जो गैर-कश्मीरियों को कश्मीर में बसने और काम करने की अनुमति देती है। हालांकि, चार दिन बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से इनकार कर दिया।
हमले के बाद भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से एक तलाशी अभियान शुरू किया। पहलगाम में अस्थायी लॉकडाउन लगा दिया गया और आतंकियों को पकड़ने के लिए सेना के हेलिकॉप्टर तैनात किए गए। 24 अप्रैल को उद्यमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक भारतीय सैनिक शहीद हो गया और दो अन्य घायल हो गए। इस हमले के बाद भारतीय अधिकारियों ने 1,500 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और कम से कम 10 कथित आतंकियों के परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हमले के जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान, गिरफ्तारी या सफाए के लिए जानकारी देने पर 60 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की।
सोनू निगम का बयान और विवाद
सोनू निगम के बयान ने सोशल मीडिया पर एक तीखी बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया, उनका तर्क था कि भाषा के नाम पर विभाजनकारी मांगें देश की एकता को कमजोर करती हैं।
@NutBoult ने लिखा, “सोनू निगम के साहसिक रुख का पूरा समर्थन। संगीत कॉन्सर्ट में भाषाई कट्टरता काफी हो चुकी है! कलाकार आपके ज्यूकबॉक्स नहीं हैं।” वहीं
@Danthidurga ने कहा, “सोनू उन लोगों पर निशाना साध रहे हैं जो भाषा के आधार पर हमारे देश को बांटते हैं।”
हालांकि, कई लोगों ने सोनू निगम की आलोचना भी की।
@Putnanja_ ने सवाल उठाया, “पहलगाम की घटना का बेंगलुरु कॉन्सर्ट में कन्नड़ गीत मांगने से क्या संबंध है? सोनू निगम दो असंबंधित चीजों को क्यों जोड़ रहे हैं? #StopHindiImposition”
@ajavgal ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “कर्नाटक में कन्नड़ का सम्मान करना इतना मुश्किल क्यों है? कर्नाटक के टैक्स से करोड़ों रुपये कश्मीर में सैन्य अभियानों पर खर्च होते हैं, फिर भी हमारी भाषा का सम्मान नहीं मिलता।”
भारत में भाषाई विवाद: एक बड़ा मुद्दा
भारत में 22 अनुसूचित भाषाएं हैं और 780 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं, जो इसे दुनिया के सबसे विविध भाषाई देशों में से एक बनाता है। लेकिन यह विविधता अक्सर तनाव का कारण भी बनती है। 1950 और 1960 के दशक में भारत को भाषाई आधार पर राज्यों में पुनर्गठित किया गया था, लेकिन फिर भी भाषा को लेकर विवाद खत्म नहीं हुए। हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा बनाने के फैसले का गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में विरोध हुआ, और अंग्रेजी-हिंदी का टकराव भी एक बड़ा मुद्दा रहा। हाल के वर्षों में, भाषाई विवादों में कमी आई है, लेकिन सोनू निगम की इस टिप्पणी ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को हवा दे दी है।
सोनू निगम और कन्नड़ संगीत
सोनू निगम ने अपने करियर में 32 से अधिक भाषाओं में 6,000 से ज्यादा गाने गाए हैं। खास तौर पर कन्नड़ फिल्मों में उनके योगदान को काफी सराहा गया है। उन्होंने 1996 में फिल्म “जीवनधि” के लिए अपना पहला कन्नड़ गीत “येल्लो यारो हेगो” गाया था। तब से उन्होंने 900 से अधिक कन्नड़ गाने गाए हैं, जिनमें “मुंगारु मालेये”, “अनिसुथिदे”, और “चेलुवे येके बंदे” जैसे लोकप्रिय गाने शामिल हैं। सोनू ने एक साक्षात्कार में कहा था, “कन्नड़ गाने मुझे सकारात्मकता देते हैं। मैं बैंगलोर को अपना दूसरा जन्मस्थान मानता हूँ।”
निष्कर्ष
सोनू निगम का यह बयान न केवल भाषाई संवेदनशीलता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत में राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय पहचान के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल है। एक ओर जहां कुछ लोग सोनू के बयान को सही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कन्नड़ भाषी समुदाय इसे अपनी भाषा और संस्कृति का अपमान मान रहा है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपनी विविधता को एकजुटता की ताकत बना सकते हैं, या यह हमें और बांट देगी? इस बहस का जवाब शायद समय ही देगा।
नोट: यह लेख सोनू निगम के बेंगलुरु कॉन्सर्ट में दिए गए बयान और उससे जुड़े विवाद पर आधारित है। सभी तथ्य उपलब्ध जानकारी और सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित हैं।