हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें दावा किया गया कि मशहूर गायक मोहम्मद रफी के गाने “जन्नत की है तस्वीर ये” को भारत सरकार ने पाकिस्तान के दबाव में प्रतिबंधित कर दिया था। यह गाना 1966 की हिंदी फिल्म जोहर इन कश्मीर का हिस्सा है और इसमें कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए राष्ट्रवादी भावनाओं को दर्शाया गया है। लेकिन क्या यह दावा सच है? आइए, इसकी सच्चाई जानने के लिए गहराई में जाएं।
X पोस्ट और उसका दावा
27 अप्रैल 2025 को@BS_Prasad नाम के एक यूजर ने X पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें एक पुराने ब्लैक-एंड-व्हाइट म्यूजिक वीडियो की झलक दिखाई गई। पोस्ट में दावा किया गया कि यह गाना, जो मोहम्मद रफी ने गाया था, पाकिस्तान को नाराज कर गया था। इसके बाद, पाकिस्तान ने भारत सरकार से इस गाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, और उस समय की भारतीय सरकार ने उनकी मांग मान ली थी। पोस्ट में यह भी कहा गया कि यह एक दुर्लभ गाना है, जिसे शायद बहुत से लोगों ने पहले नहीं सुना होगा। इस पोस्ट ने कई लोगों का ध्यान खींचा और इस पर कई प्रतिक्रियाएं आईं।
गाने का संदर्भ और कश्मीर विवाद
“जन्नत की है तस्वीर ये” गाना 1966 की फिल्म जोहर इन कश्मीर का हिस्सा है, जिसमें अभिनेता आई.एस. जोहर ने मुख्य भूमिका निभाई थी और इसका निर्देशन भी उन्होंने ही किया था। गाने के बोल कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हैं और इसे “जन्नत की तस्वीर” कहकर इसकी खूबसूरती और महत्व को रेखांकित करते हैं। गाने में कुछ पंक्तियां, जैसे “हाजी पीर से लाहौर तक, झंडा हमारा लेहरेगा”, सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता और कश्मीर पर उसके दावे को मजबूत करती हैं।
यह गाना उस समय रिलीज हुआ था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर तनाव चरम पर था। कश्मीर विवाद की जड़ें 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन तक जाती हैं, जब भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग देश बने। जम्मू और कश्मीर के महाराजा ने पहले स्वतंत्र रहने का फैसला किया था, लेकिन बाद में भारत के साथ विलय कर लिया। इसके बाद से ही यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। 1955 में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पूंछ विद्रोह और 2019 में पुलवामा हमला जैसे घटनाओं ने इस तनाव को और बढ़ाया है। ऐसे में, इस गाने के बोल उस समय के संवेदनशील माहौल को दर्शाते हैं।
क्या सच में गाने पर प्रतिबंध लगा था?
X पोस्ट के दावे की सच्चाई जानने के लिए कई फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स का सहारा लिया गया। 2024 में द क्विंट द्वारा प्रकाशित एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि “जन्नत की है तस्वीर ये” गाने पर कभी प्रतिबंध नहीं लगा था। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने इस गाने में कुछ बदलाव करने की सिफारिश की थी, जिसमें “हाजी पीर” शब्द को हटाना शामिल था। यह बदलाव 1966 में भारत सरकार के एक गजट दस्तावेज में भी दर्ज है, जिसमें सेंसर बोर्ड ने फिल्म के कुछ हिस्सों को संपादित करने के निर्देश दिए थे।
इसके अलावा, ऑल्ट न्यूज की एक रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई कि गाने पर प्रतिबंध का दावा गलत है। मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी से संपर्क करने पर भी इस बात की पुष्टि हुई कि गाने को प्रतिबंधित नहीं किया गया था, बल्कि केवल कुछ शब्दों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। गाने के ऑनलाइन उपलब्ध संस्करणों में भी “हाजी पीर” या “लाहौर” से शुरू होने वाली पंक्तियां नहीं मिलतीं, जो इस बात का संकेत है कि सेंसर बोर्ड के निर्देशों के बाद गाने के बोल में बदलाव किए गए थे।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इस X पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने गाने की तारीफ की और इसे राष्ट्रवादी भावनाओं से भरा बताया, जबकि कुछ ने दावे को गलत ठहराते हुए कहा कि यह गाना कभी प्रतिबंधित नहीं हुआ था। एक यूजर
@Soumya_Ray ने लिखा, “यह एक बेहतरीन गाना है। मैंने इसे हमेशा सुना है। इसे कभी प्रतिबंधित नहीं किया गया, केवल ‘हाजी पीर’ शब्द को हटाया गया था। कृपया गलत खबरें न फैलाएं।” वहीं,
@vssvijayssharma ने गाने के पूरे बोल साझा किए और इसे एक शानदार रचना बताया।
कई यूजर्स ने इस गाने को कश्मीर के संदर्भ में देखते हुए इसे एक प्रतीकात्मक महत्व दिया।
@prasanthbhatt86 ने सुझाव दिया कि इस गाने को कश्मीर की मस्जिदों में दिन में दो बार बजाया जाना चाहिए, ताकि यह एक राष्ट्रवादी संदेश के रूप में लोगों तक पहुंचे।
निष्कर्ष
मोहम्मद रफी का गाना “जन्नत की है तस्वीर ये” कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताने वाला एक शानदार राष्ट्रवादी गीत है। हालांकि, X पोस्ट में किया गया दावा कि इसे पाकिस्तान के दबाव में भारत सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था, पूरी तरह से गलत है। फैक्ट-चेक रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह साफ होता है कि गाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा था, बल्कि केवल कुछ शब्दों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। यह गाना उस समय की भारतीय सिनेमा की भावना को दर्शाता है, जब राष्ट्रवाद और देशभक्ति से भरे गीत फिल्मों का अहम हिस्सा हुआ करते थे।
इस घटना से यह भी सीख मिलती है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली खबरों की सच्चाई को परखना बेहद जरूरी है, ताकि गलत सूचनाओं से बचा जा सके। कश्मीर का मुद्दा आज भी भारत और पाकिस्तान के बीच एक संवेदनशील विषय है, और इस तरह के गाने उस इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण झलक प्रदान करते हैं।