Donald Trump on India’s GDP: ‘भारत कर सकता है, तो अमेरिका क्यों नहीं?’ डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लगाई फटकार, भारत की ग्रोथ को बताया बेंचमार्क!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से वैश्विक आर्थिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस बार ट्रंप के निशाने पर कोई विरोधी देश नहीं, बल्कि खुद अमेरिका का केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) है। CNBC को दिए एक विस्फोटक इंटरव्यू में ट्रंप ने भारत की आर्थिक रफ्तार की खुलकर तारीफ की और अमेरिकी नीति निर्माताओं को आईना दिखाया।

ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं लगातार 7 से 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती हैं, तो अमेरिका खुद को 4 फीसदी पर क्यों रोक रहा है?

‘हमें रोकने की कोशिश होती है’ – ट्रंप का फेडरल रिजर्व पर बड़ा हमला

इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:

“दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं, जिनमें से भारत एक है, जो बहुत अच्छा कर रहे हैं। वे 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। लेकिन हमारे यहाँ (अमेरिका में) हमें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती। जैसे ही हमारे आंकड़े ऊपर जाते हैं, वे (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरें बढ़ाकर इसे मारना चाहते हैं।”

ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका को अपनी मौजूदा रफ्तार से संतुष्ट होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने एक चौंकाने वाला टारगेट सेट करते हुए कहा, “ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें 4 प्रतिशत पर रुक जाना चाहिए। अमेरिका को 12% और 13% GDP ग्रोथ का लक्ष्य रखना चाहिए।”

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विश्लेषण: क्या वाकई अमेरिका के लिए भारत जैसी रफ्तार मुमकिन है?

फुटबॉल की भाषा में कहें तो ट्रंप ने भारत को ‘बेंचमार्क’ (पैमाना) बना दिया है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों की जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है:

1. भारत की रफ्तार के पीछे का गणित

भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.7% दर्ज की गई है, जबकि जनवरी-मार्च तिमाही में यह 7.8% रही। आईएमएफ (IMF) का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी विकास दर में भारत की हिस्सेदारी 17% होगी, जो अमेरिका (9.9%) से काफी अधिक है। जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने भारत ($4.18 ट्रिलियन जीडीपी) की इस ग्रोथ के पीछे घरेलू खपत (Domestic Consumption) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सरकारी खर्च सबसे बड़ा कारण है।

2. अमेरिका की मजबूरी और महंगाई का डर

अमेरिका पहले से ही एक विकसित और $25+ ट्रिलियन की विशाल अर्थव्यवस्था है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इतने बड़े बेस पर 12-13% की ग्रोथ हासिल करना लगभग नामुमकिन है। फेडरल रिजर्व का मानना है कि अगर अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से भागेगी, तो बाजार में लिक्विडिटी (पैसे का बहाव) बढ़ेगी, जिससे महंगाई (Inflation) बेकाबू हो जाएगी। यही कारण है कि रोजगार के अच्छे आंकड़े आते ही फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा देता है ताकि मार्केट को स्टेबल रखा जा सके। हालांकि, ट्रंप का तर्क इसके उलट है—उनका कहना है कि मजबूत ग्रोथ महंगाई को कम भी कर सकती है, न कि सिर्फ बढ़ाती है।

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लुटनिक का दावा: 2026 के अंत तक 6% छुएगा अमेरिका

भले ही अर्थशास्त्री ट्रंप के 13% के दावे को हकीकत से दूर मान रहे हों, लेकिन ट्रंप प्रशासन के वाणिज्य सचिव (Commerce Secretary) हावर्ड लुटनिक (Howard Lutnick) ने इस साल की शुरुआत में ही संकेत दे दिए थे कि अमेरिका लंबी छलांग लगाने को तैयार है। लुटनिक ने भविष्यवाणी की थी कि:

  • 2026 की पहली तिमाही में अमेरिकी जीडीपी 5% को पार कर जाएगी।
  • साल 2026 के अंत तक यह 6% तक पहुंच सकती है, जो महामारी के बाद (2021 के बाद) अमेरिका की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि होगी।

निष्कर्ष: भारत-अमेरिका के बदलते रिश्ते

ट्रंप का भारत की तारीफ करना सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों को दिखाता है। गोल्डमैन सैक्स ने भी 2026 में भारत की ग्रोथ रेट 6.9% रहने का अनुमान जताया है। जैसे-जैसे वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को चीन से हटाकर डाइवर्सिफाई कर रही हैं, वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी और डिफेंस में रिश्ते और गहरे होते जा रहे हैं। ट्रंप अब अमेरिकी जनता को यह समझाने के लिए भारत के मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं कि ‘ग्रोथ से डरने की जरूरत नहीं है।’

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