नई दिल्ली: हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के प्रमुख चेहरे सौरभ द्विवेदी ने हाल ही में इंडिया टुडे ग्रुप के लोकप्रिय प्लेटफॉर्म ‘द लल्लनटॉप’ को अलविदा कह दिया है और अब वे ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप के साथ जुड़ गए हैं। यह खबर सोशल मीडिया और मीडिया सर्कल्स में तेजी से फैली है, लेकिन क्या यह पूरी तरह सत्य है? हमने विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से इसकी जांच की है।
सबसे पहले, खबर की पुष्टि: सौरभ द्विवेदी ने 5 जनवरी 2026 को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दो पोस्ट के माध्यम से अपनी विदाई की घोषणा की थी। उन्होंने लिखा, “धन्यवाद, द लल्लनटॉप। पहचान के लिए, सीख के लिए, हौसला बढ़ाने के लिए। और भविष्य के लिए शुभकामनाएं। यहां हमारा साथ खत्म होता है। मैं स्टडी लीव लूंगा और फिर आगे की योजनाओं पर चर्चा करूंगा।” इसके बाद एक हिंदी दोहे के साथ एक फोटो शेयर की, जो नए सफर की ओर इशारा कर रही थी। इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कल्ली पुरी ने भी उनकी सराहना की और कहा कि उन्होंने लल्लनटॉप को भारत के युवाओं के लिए एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बनाया, लेकिन उन्होंने ग्रुप के पोर्टफोलियो से बाहर रचनात्मक अवसरों की खोज की इच्छा जताई थी।
कुछ दिनों बाद, 22-23 जनवरी 2026 को विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह सामने आया कि द्विवेदी इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी डिजिटल विस्तार का नेतृत्व करेंगे। एक्स पर कई यूजर्स ने इसकी पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि द्विवेदी ने खुद इसकी कन्फर्मेशन दी है। न्यूजलॉन्ड्री और एक्सचेंज4मीडिया जैसी वेबसाइट्स ने भी इसकी रिपोर्ट की, जिसमें बताया गया कि वे संपादकीय सामग्री, वीडियो शो, ई-पेपर और डिजिटल पहलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, एक रिपोर्ट में इस खबर को नकारा गया था, लेकिन बाद की अपडेट्स और द्विवेदी की पुष्टि से यह स्पष्ट हो गया कि खबर सत्य है।
अब सवाल उठता है कि द्विवेदी ने लल्लनटॉप क्यों छोड़ा? आधिकारिक तौर पर, यह उनके रचनात्मक अवसरों की खोज और स्टडी लीव के कारण बताया गया है। लल्लनटॉप में उन्होंने 12 वर्षों में इसे शून्य से 3.5 करोड़ यूट्यूब सब्सक्राइबर्स और महीने में 25 करोड़ से अधिक व्यूज तक पहुंचाया। वे लल्लनटॉप के फाउंडिंग एडिटर थे और इंडिया टुडे हिंदी के एडिटर भी। लेकिन कुछ अनौपचारिक चर्चाओं में यह कहा जा रहा है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और संस्थागत विकास के बीच टकराव हो सकता है। रेडिट और यूट्यूब पर कुछ थ्योरीज़ हैं, जैसे मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना वाले एपिसोड के बाद दबाव, लेकिन ये सिर्फ अटकलें हैं और कोई ठोस सबूत नहीं है। द्विवेदी की नई भूमिका इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी बाजार में विस्तार को मजबूत करेगी, जहां वे युवा दर्शकों के लिए कन्वर्सेशनल जर्नलिज्म जारी रख सकते हैं।
यह कदम हिंदी मीडिया की बदलती गतिशीलता को दर्शाता है, जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बड़े नामों का मूवमेंट नई संभावनाएं खोल रहा है। क्या द्विवेदी इंडियन एक्सप्रेस में लल्लनटॉप जैसा जादू दोहरा पाएंगे? समय बताएगा।